अपनी जिंदगी जीना आता है हमें,
बस वो जमाना भूल गए।
"छूँ लू आसमां को" ख्वाब हमारे भी है,
हम तो बस सर उठाना भूल गए।
शर्मो हया लाज से सरोकार रखती हैं निगाहें हमारी भी,
हम तो बस निगाहोँ को झुकाना भूल गए।
हंसते तो हम भी खूब हैं,
बस दूसरों को हसाना भूल गए।
रुलाते तो तुम भी थे बहुतों को,
हम तो बस चुप कराना भूल गए।
खुशियाँ तो हम भी बाँट लेते हैं,
पर छोटी-छोटी बांतो पे सताना भूल गए।
रातों की वो अठखेलियां याद हैं हमें,
पर अब तो जुगनू घर पे आना भूल गए।
अलविदा कहने हम भी जाते हैं, घर की दहलीज तक,
बस वो पक्की सड़क तक पहुंचाना भूल गए।
"इश्क एक आग का दरिया है" जानते है हम,
बस उस दरिया में डुबकी लगाना भूल गए।
ताज महल की खूबसूरती हमेँ भी है लुभाती,
वो भी है एक "इश्क का नजराना" भूल गए।
एहसास हमें भी है भूल जाने का,
समझ नहीं की क्या करें,
खुद को समझाना भूल गए।
शिकायत नहीं है ये,
पर शायद तुम हमें याद दिलाना भूल गए।
बस वो जमाना भूल गए।
"छूँ लू आसमां को" ख्वाब हमारे भी है,
हम तो बस सर उठाना भूल गए।
शर्मो हया लाज से सरोकार रखती हैं निगाहें हमारी भी,
हम तो बस निगाहोँ को झुकाना भूल गए।
हंसते तो हम भी खूब हैं,
बस दूसरों को हसाना भूल गए।
रुलाते तो तुम भी थे बहुतों को,
हम तो बस चुप कराना भूल गए।
खुशियाँ तो हम भी बाँट लेते हैं,
पर छोटी-छोटी बांतो पे सताना भूल गए।
रातों की वो अठखेलियां याद हैं हमें,
पर अब तो जुगनू घर पे आना भूल गए।
अलविदा कहने हम भी जाते हैं, घर की दहलीज तक,
बस वो पक्की सड़क तक पहुंचाना भूल गए।
"इश्क एक आग का दरिया है" जानते है हम,
बस उस दरिया में डुबकी लगाना भूल गए।
ताज महल की खूबसूरती हमेँ भी है लुभाती,
वो भी है एक "इश्क का नजराना" भूल गए।
एहसास हमें भी है भूल जाने का,
समझ नहीं की क्या करें,
खुद को समझाना भूल गए।
शिकायत नहीं है ये,
पर शायद तुम हमें याद दिलाना भूल गए।

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